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नक़्श फ़रियादी है किस की शोख़ी-ए-तहरीर का

मिर्ज़ा ग़ालिब

नक़्श फ़रियादी है किस की शोख़ी-ए-तहरीर का

मिर्ज़ा ग़ालिब

MORE BYमिर्ज़ा ग़ालिब

    रोचक तथ्य

    Ghalib himself has said in a letter regarding this couplet that "in Iran, it is a custom that the plantiff would go to the ruler in a paper robe, such as lighting a torch during the day or hanging a blood-stained cloth on a bamboo pole."

    नक़्श फ़रियादी है किस की शोख़ी-ए-तहरीर का

    काग़ज़ी है पैरहन हर पैकर-ए-तस्वीर का

    काव काव-ए-सख़्त-जानी हाए-तन्हाई पूछ

    सुब्ह करना शाम का लाना है जू-ए-शीर का

    जज़्बा-ए-बे-इख़्तियार-ए-शौक़ देखा चाहिए

    सीना-ए-शमशीर से बाहर है दम शमशीर का

    आगही दाम-ए-शुनीदन जिस क़दर चाहे बिछाए

    मुद्दआ अन्क़ा है अपने आलम-ए-तक़रीर का

    बस-कि हूँ 'ग़ालिब' असीरी में भी आतिश ज़ेर-ए-पा

    मू-ए-आतिश दीदा है हल्क़ा मिरी ज़ंजीर का

    आतिशीं-पा हूँ गुदाज़-ए-वहशत-ए-ज़िन्दाँ पूछ

    मू-ए-आतिश दीदा है हर हल्क़ा याँ ज़ंजीर का

    शोख़ी-ए-नैरंग सैद-ए-वहशत-ए-ताऊस है

    दाम-ए-सब्ज़ा में है परवाज़-ए-चमन तस्ख़ीर का

    लज़्ज़त-ए-ईजाद-ए-नाज़ अफ़सून-ए-अर्ज़-ज़ौक़-ए-क़त्ल

    ना'ल आतिश में है तेग़-ए-यार से नख़चीर का

    ख़िश्त पुश्त-ए-दस्त-ए-इज्ज़ क़ालिब आग़ोश-ए-विदा'अ

    पुर हुआ है सैल से पैमाना किस ता'मीर का

    वहशत-ए-ख़्वाब-ए-अदम शोर-ए-तमाशा है 'असद'

    जो मज़ा जौहर नहीं आईना-ए-ताबीर का

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    तलअत महमूद

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    फ़सीह अकमल

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    नक़्श फ़रियादी है किस की शोख़ी-ए-तहरीर का जावेद नसीम

    फ़सीह अकमल

    नक़्श फ़रियादी है किस की शोख़ी-ए-तहरीर का फ़सीह अकमल

    स्रोत :
    ગુજરાતી ભાષા-સાહિત્યનો મંચ : રેખ્તા ગુજરાતી

    ગુજરાતી ભાષા-સાહિત્યનો મંચ : રેખ્તા ગુજરાતી

    મધ્યકાલથી લઈ સાંપ્રત સમય સુધીની ચૂંટેલી કવિતાનો ખજાનો હવે છે માત્ર એક ક્લિક પર. સાથે સાથે સાહિત્યિક વીડિયો અને શબ્દકોશની સગવડ પણ છે. સંતસાહિત્ય, ડાયસ્પોરા સાહિત્ય, પ્રતિબદ્ધ સાહિત્ય અને ગુજરાતના અનેક ઐતિહાસિક પુસ્તકાલયોના દુર્લભ પુસ્તકો પણ તમે રેખ્તા ગુજરાતી પર વાંચી શકશો

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