आज के चुनिन्दा 5 शेर

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर सको तो आओ

मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

मुस्तफ़ा ज़ैदी

इस ज़िंदगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब

इतना याद कि तुझे भूल जाएँ हम

अहमद फ़राज़

मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा

उस को छुट्टी मिली जिस को सबक़ याद हुआ

मीर ताहिर अली रिज़वी
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कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत

जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है

the river's raging is advised by the tranquil sea

the greater power you possess, the quieter you be

the river's raging is advised by the tranquil sea

the greater power you possess, the quieter you be

नातिक़ लखनवी

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं

तुझे ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं

फ़िराक़ गोरखपुरी
आज का शब्द

मक़्तल

  • maqtal
  • مقتل

शब्दार्थ

a place of slaughter or, execution

ये किस ने हम से लहू का ख़िराज फिर माँगा

अभी तो सोए थे मक़्तल को सुर्ख़-रू कर के

शब्दकोश

क्या आप जानते हैं?

किश्वर

मशहूर शायरा और लेखिका किश्वर नाहीद की चौंका देने वाली आत्म कथा "बुरी औरत की कथा" पहले हिंदुस्तान में 1994 में प्रकाशित हुई थी। किताब में उनकी ज़िंदगी के हालात से ज़्यादा सामाजिक सरोकार है और समाज में औरत की हैसियत का मुक़दमा है। तेरह अध्याय में विभाजित इस किताब में पहले छः अध्याय 'पहला' या 'पहली' से शुरू होते हैैं जो उनके जीवन के विभिन्न पक्षों पर आधारित हैं, जिनमें हिंदुस्तान में उनकेे पैतृक स्थान बुलंदशहर के पारिवारिक रीति रिवाज, पाकिस्तान प्रवास की वेदना और तेरह वर्ष की आयु से क़लमी दोस्तियों के शौक़, लाहौर में कालेज के दिनों की अदबी सरगर्मियों, शायरी की लोकप्रियता और अदीबों-शायरों से मुलाक़ातों और महफ़िलों का उल्लेख है। "पहली लग़ज़िश" शीर्षक में उनकेे यूसुफ़ कामरान से प्रेम प्रसंग, अपने घर वालों को बताये बिना अचानक उनसे शादी, जिसके कारण घर वालों ने संबंध विच्छेद कर लिया था, ससुराल वालों की नफ़रत, व्यंग्य और फिर किश्वर की नौकरी, ख़र्चों की परेशानी, बच्चों की पैदाइश व परवरिश, शौहर की अय्याशियों और रंगीन मिज़ाजी का वर्णन है। शराब की महफ़िलों में मदहोशी के आलम में लोगों की विचित्र हरकतों का भी चित्रण किया है।
इसके अलावा किताब में कुछ मशहूर नारी पात्रों को नारीवादी दृष्टि से चर्चा का विषय बनाया है। इस किताब की शैली अन्य आत्मकथाओं से बहुत भिन्न है। घटनाओं के वर्णन के बीच में आत्म संबोधन या मोनो लाग भी शामिल हैं जो प्राय: गद्य कविता का आनंद दे जाते हैं।

आर्काइव

आज की प्रस्तुति

प्रसिद्ध शायर एवं गीतकार जो फिल्म "पाकीज़ा" में अपने गीत के लिए मशहूर हुए।

कौन आएगा यहाँ कोई आया होगा

मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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उमैर नजमी

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