आज के चुनिन्दा 5 शेर

ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन दोस्त

वो तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में

फ़िराक़ गोरखपुरी
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अपनी अना की आज भी तस्कीन हम ने की

जी भर के उस के हुस्न की तौहीन हम ने की

इक़बाल साजिद

दिल-ए-मुज़्तर से पूछ रौनक़-ए-बज़्म

मैं ख़ुद आया नहीं लाया गया हूँ

शाद अज़ीमाबादी

हज़ार रुख़ तिरे मिलने के हैं मिलने में

किसे फ़िराक़ कहूँ और किसे विसाल कहूँ

रविश सिद्दीक़ी

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा था

सामने बैठा था मेरे और वो मेरा था

अदीम हाशमी
आज का शब्द

इंतिहा

  • intihaa
  • انتہا

शब्दार्थ

utmost limit, end, extremity

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ

मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है

यादों के दरीचों में चिलमन सी सरकती है

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जावेद अख़्तर

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया | जावेद अख़्तर

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