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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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अख़्तर शुमार

1960 - 2022 | लाहौर, पाकिस्तान

प्रसिद्ध उर्दू शायर, शिक्षाविद, शोधकर्ता, आलोचक, स्तंभकार और साहित्यिक पत्रकार, फ़ोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज लाहौर के पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष, ऐन शम्स विश्वविद्यालय (मिस्र) में उर्दू साहित्य के अध्यक्ष तथा जामिअतुल-अज़हर (मिस्र) में उर्दू के शिक्षक रहे

प्रसिद्ध उर्दू शायर, शिक्षाविद, शोधकर्ता, आलोचक, स्तंभकार और साहित्यिक पत्रकार, फ़ोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज लाहौर के पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष, ऐन शम्स विश्वविद्यालय (मिस्र) में उर्दू साहित्य के अध्यक्ष तथा जामिअतुल-अज़हर (मिस्र) में उर्दू के शिक्षक रहे

अख़्तर शुमार

ग़ज़ल 15

नज़्म 1

 

अशआर 12

मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा बने

तू समझता है मुझे तुझ से गिला कुछ भी नहीं

अब तो हाथों से लकीरें भी मिटी जाती हैं

उस को खो कर तो मिरे पास रहा कुछ भी नहीं

मैं घर को फूँक रहा था बड़े यक़ीन के साथ

कि तेरी राह में पहला क़दम उठाना था

अभी सफ़र में कोई मोड़ ही नहीं आया

निकल गया है ये चुप-चाप दास्तान से कौन

मुद्दतों में आज दिल ने फ़ैसला आख़िर दिया

ख़ूब-सूरत ही सही लेकिन ये दुनिया झूट है

पुस्तकें 3

 

ऑडियो 3

अभी दिल में गूँजती आहटें मिरे साथ हैं

ज़रा सी देर थी बस इक दिया जलाना था

लरज़ उठा है मिरे दिल में क्यूँ न जाने दिया

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