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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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नई ग़ज़लें

उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह

आदमी का आदमी शैदा मिले

वासिफ़ अली वासिफ़

आए और दुख का करे आ के मुदावा कोई

मोहम्मद मुस्तहसन जामी

आज तेरे हर भरम को तोड़ता जाता हूँ मैं

डॉ. जी. गणेशन मिश्रा समीर

आरज़ू इतनी है जान-ए-आरज़ू

वासिफ़ अली वासिफ़

आरज़ू-ए-दीद तू है

अरमान अहमद

ऐसा करना दिल-ए-बेदार न वैसा करना

मोहम्मद मुस्तहसन जामी

अकेले-पन में बहुत बद-हवास होते हैं

मोहम्मद मुस्तहसन जामी

अपने किसी कमाल का ए'लान क्या करे

मोहम्मद मुस्तहसन जामी

अपनी 'इज़्ज़त बचा ख़ुदा के लिए

क़ैसर इमरान सियालवी

अश्क जब ख़ुद ज़बाँ हो गए

सय्यद रिज़वान रावी

बात ऐसी नहीं उस बात पे रोना आया

क़ैसर इमरान सियालवी
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