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अता आबिदी

1962 | पटना, भारत

पत्रकार और कवि,अपने बाल साहित्य के लिए जाने जाते हैं

पत्रकार और कवि,अपने बाल साहित्य के लिए जाने जाते हैं

अता आबिदी

अशआर 8

ज़रूरत ढल गई रिश्ते में वर्ना

यहाँ कोई किसी का अपना कब है

सब्र की हद भी तो कुछ होती है

कितना पलकों पे सँभालूँ पानी

आज भी 'प्रेम' के और 'कृष्ण' के अफ़्साने हैं

आज भी वक़्त की जम्हूरी ज़बाँ है उर्दू

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अदब ही ज़िंदगी में जब आया

अदब में इतनी मेहनत किस लिए है

किसी के जिस्म-ओ-जाँ छलनी किसी के बाल-ओ-पर टूटे

जली शाख़ों पे यूँ लटके कबूतर देख आया हूँ

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ग़ज़ल 11

नज़्म 13

पहेली 10

पुस्तकें 14

वीडियो 7

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ऑडियो 7

कोई भी ख़ुश नहीं है इस ख़बर से

तुझ को ख़िफ़्फ़त से बचा लूँ पानी

तमाशा ज़िंदगी का रोज़ ओ शब है

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