- पुस्तक सूची 188668
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ76
बाल-साहित्य1988
नाटक / ड्रामा927 एजुकेशन / शिक्षण345 लेख एवं परिचय1392 कि़स्सा / दास्तान1599 स्वास्थ्य105 इतिहास3318हास्य-व्यंग613 पत्रकारिता202 भाषा एवं साहित्य1731 पत्र745
जीवन शैली27 औषधि977 आंदोलन277 नॉवेल / उपन्यास4313 राजनीतिक356 धर्म-शास्त्र4767 शोध एवं समीक्षा6665अफ़साना2703 स्केच / ख़ाका248 सामाजिक मुद्दे111 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2053पाठ्य पुस्तक466 अनुवाद4304महिलाओं की रचनाएँ5901-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर68
- दीवान1303
- दोहा48
- महा-काव्य101
- व्याख्या182
- गीत64
- ग़ज़ल1257
- हाइकु12
- हम्द50
- हास्य-व्यंग33
- संकलन1613
- कह-मुकरनी7
- कुल्लियात585
- माहिया20
- काव्य संग्रह4858
- मर्सिया388
- मसनवी774
- मुसद्दस41
- नात580
- नज़्म1192
- अन्य82
- पहेली15
- क़सीदा186
- क़व्वाली17
- क़ित'अ68
- रुबाई274
- मुख़म्मस16
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं17
- सलाम32
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा18
- तारीख-गोई27
- अनुवाद68
- वासोख़्त26
माहिर-उल क़ादरी
लेख 4
अशआर 10
अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है
दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
इक बार तुझे अक़्ल ने चाहा था भुलाना
सौ बार जुनूँ ने तिरी तस्वीर दिखा दी
EXPLANATION #1
इस शे’र में इश्क़ की घटना को अक़्ल और जुनूँ के पैमानों में तौलने का पहलू बहुत दिलचस्प है। इश्क़ के मामले में अक़्ल और उन्माद का द्वंद शाश्वत है। जहाँ अक़्ल इश्क़ को मानव जीवन के लिए हानि का एक कारण मानती है वहीं उन्माद इश्क़ को मानव जीवन का सार मानती है।और अगर इश्क़ में उन्माद पर अक़्ल हावी हो गया तो इश्क़ इश्क़ नहीं रहता क्योंकि इश्क़ की पहली शर्त जुनून है। और जुनून का ठिकाना दिल है। इसलिए अगर आशिक़ दिल के बजाय अक़्ल की सुने तो वो अपने उद्देश्य में कभी कामयाब नहीं होगा।
शायर कहना चाहता है कि मैं अपने महबूब के इश्क़ में इस क़दर मजनूं हो गया हूँ कि उसे भुलाने के लिए अक़्ल ने एक बार ठान ली थी मगर मेरे इश्क़ के जुनून ने मुझे सौ बार अपने महबूब की तस्वीर दिखा दी। “तस्वीर दिखा” भी ख़ूब है। क्योंकि उन्माद की स्थिति में इंसान एक ऐसी स्थिति से दो-चार होजाता है जब उसकी आँखों के सामने कुछ ऐसी चीज़ें दिखाई देती हैं जो यद्यपि वहाँ मौजूद नहीं होती हैं मगर इस तरह के जुनून में मुब्तला इंसान उन्हें हक़ीक़त समझता है। शे’र अपनी स्थिति की दृष्टि से बहुत दिलचस्प है।
शफ़क़ सुपुरी
ग़ज़ल 18
नज़्म 2
नअत 3
क़ितआ 4
पुस्तकें 313
चित्र शायरी 2
वीडियो 12
ऑडियो 9
अगर फ़ितरत का हर अंदाज़ बेबाकाना हो जाए
अभी दश्त-ए-कर्बला में है बुलंद ये तराना
ऐ निगाह-ए-दोस्त ये क्या हो गया क्या कर दिया
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ76
बाल-साहित्य1988
-
