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मिलेगी शैख़ को जन्नत, हमें दोज़ख़ अता होगा

हरी चंद अख़्तर

मिलेगी शैख़ को जन्नत, हमें दोज़ख़ अता होगा

हरी चंद अख़्तर

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    रोचक तथ्य

    एक साहब ने मुश्फ़िक़ ख्वाजा को हरी चाँद अख़्तर का एक मतला सुनाया जिसमे उन्होंने 'दोज़ख ( नर्क) ' को पुल्लिंग बांधा था l ख्वाजा साहब से पूछा गया कि दोज़ख स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग ? उन्होंने कहा की हर दो सूरतों में इस से पनाह माँगनी चाहिए l फिर मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि 'स्त्रीलिंग' है क्यूँकि लोग इस के भयानक परिणाम के बावजूद इसकी लालसा करते हैं

    मिलेगी शैख़ को जन्नत, हमें दोज़ख़ अता होगा

    बस इतनी बात है जिस के लिए महशर बपा होगा

    रहे दो दो फ़रिश्ते साथ अब इंसाफ़ क्या होगा

    किसी ने कुछ लिखा होगा किसी ने कुछ लिखा होगा

    ब-रोज़-ए-हश्र हाकिम क़ादिर-ए-मुतलक़ ख़ुदा होगा

    फ़रिश्तों के लिखे और शैख़ की बातों से क्या होगा

    तिरी दुनिया में सब्र शुक्र से हम ने बसर कर ली

    तिरी दुनिया से बढ़ कर भी तिरे दोज़ख़ में क्या होगा

    सुकून-ए-मुस्तक़िल दिल बे-तमन्ना शैख़ की सोहबत

    ये जन्नत है तो इस जन्नत से दोज़ख़ क्या बुरा होगा

    मिरे अशआ'र पर ख़ामोश है जिज़-बिज़ नहीं होता

    ये वाइज़ वाइ'ज़ों में कुछ हक़ीक़त-आश्ना होगा

    भरोसा किस क़दर है तुझ को 'अख़्तर' उस की रहमत पर

    अगर वो शैख़-साहिब का ख़ुदा निकला तो क्या होगा

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    राहील फ़ारूक़

    राहील फ़ारूक़

    स्रोत:

    sheerazah (Pg. 24)

    • लेखक: makhmoor saeedi,Parem Gopal Mittal
      • संस्करण: 1973
      • प्रकाशक: P -K Publication 3072 Partap stareet gola Market -Daryaganj delhi-6
      • प्रकाशन वर्ष: 1973

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