फ़ैज़ाबाद के शायर और अदीब

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लखनऊ के अग्रगी क्लासिकी शायरों में विख्यात/मर्सिया के महान शायर

18वी सदी के अग्रणी शायर, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन, 19वीं सदी की उर्दू ग़ज़ल का रौशन सितारा।

लखनऊ के मुम्ताज़ और नई राह बनाने वाले शायर/मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन

अपनी शायरी में महबूब के साथ मामला-बंदी के मज़मून के लिए मशहूर, नौजवानी में नेत्रहीन हो गए

अवध के नवाब

अवध के नवाब, आसिफ-उद-दौला के ममेरे भाई, कई शायरों के संरक्षक

उत्तर-क्लासिकी शायर, अपने सर्वाधिक लोकप्रिय शेरों के लिए प्रसिद्ध

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायरों में विख्यात।

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर/रामायण पर अपनी नज़्म के लिए विख्यात/मशहूर शेर ‘जि़ंदगी क्या है अनासिर में ज़हूर-ए-तरतीब......’ के रचयिता

नई नस्ल के सबसे प्रमुख शायरों में शामिल/उभरते हुए आलोचक

प्रख्यात फिक्शन लेखक, उपन्यासकार एवम उपमहाद्वीप की तरक़्क़ी पसंद आंदोलन के रहनुमाओं में से एक

पूर्व आधुनिक शायर, लखनऊ के साहित्यिक परिवेश में उम्र गुज़ारी