लफ़्ज़ ओ मंज़र में मआनी को टटोला न करो

महमूद अयाज़

लफ़्ज़ ओ मंज़र में मआनी को टटोला न करो

महमूद अयाज़

MORE BYमहमूद अयाज़

    लफ़्ज़ मंज़र में मआनी को टटोला करो

    होश वाले हो तो हर बात को समझा करो

    वो नहीं है सही तर्क-ए-तमन्ना करो

    दिल अकेला है इसे और अकेला करो

    बंद आँखों में हैं नादीदा ज़माने पैदा

    खुली आँखों ही से हर चीज़ को देखा करो

    दिन तो हंगामा-ए-हस्ती में गुज़र जाएगा

    सुब्ह तक शाम को अफ़्साना-दर-अफ़्साना करो

    स्रोत :
    • पुस्तक : naqsh-e-bar aab (पृष्ठ 84)
    • रचनाकार : mahmood ayaaz
    • प्रकाशन : Modern Publishing House, Darya Ganj new delhi (2001)
    • संस्करण : 2001

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