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अब्बास रिज़वी

पाकिस्तान

अब्बास रिज़वी

ग़ज़ल 10

अशआर 10

तलब करें तो ये आँखें भी इन को दे दूँ मैं

मगर ये लोग इन आँखों के ख़्वाब माँगते हैं

बहुत अज़ीज़ थी ये ज़िंदगी मगर हम लोग

कभी कभी तो किसी आरज़ू में मर भी गए

अजीब तुर्फ़ा-तमाशा है मेरे अहद के लोग

सवाल करने से पहले जवाब माँगते हैं

ख़ौफ़ ऐसा है कि दुनिया के सताए हुए लोग

कभी मिम्बर कभी मेहराब से डर जाते हैं

तमाम उम्र की बे-ताबियों का हासिल था

वो एक लम्हा जो सदियों के पेश-ओ-पस में रहा

पुस्तकें 1

 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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