aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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अबरार आज़मी

1936 - 2020 | आज़मगढ़, भारत

अबरार आज़मी

ग़ज़ल 13

नज़्म 21

अशआर 9

कमरे में धुआँ दर्द की पहचान बना था

कल रात कोई फिर मिरा मेहमान बना था

तमाम रात वो पहलू को गर्म करता रहा

किसी की याद का नश्शा शराब जैसा था

परिंदे फ़ज़ाओं में फिर खो गए

धुआँ ही धुआँ आशियानों में था

मुझे भी फ़ुर्सत-ए-नज़्ज़ारा-ए-जमाल थी

और उस को पास किसी और के भी जाना था

आवाज़ों का बोझ उठाए सदियों से

बंजारों की तरह गुज़ारा करता हूँ

पुस्तकें 2

 

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