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अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

1928 - 2009 | रामपुर, भारत

इस्लामी चिन्तन के प्रभाव में शायरी करनेवाले प्रसिद्ध शायर

इस्लामी चिन्तन के प्रभाव में शायरी करनेवाले प्रसिद्ध शायर

अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

ग़ज़ल 6

नज़्म 2

 

शेर 9

एक हो जाएँ तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं

वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने

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तुम चलो इस के साथ या चलो

पाँव रुकते नहीं ज़माने के

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तमाम उम्र ख़ुशी की तलाश में गुज़री

तमाम उम्र तरसते रहे ख़ुशी के लिए

मिला घर से निकल कर भी चैन 'ज़ाहिद'

खुली फ़ज़ा में वही ज़हर था जो घर में था

लोग चुन लें जिस की तहरीरें हवालों के लिए

ज़िंदगी की वो किताब-ए-मो'तबर हो जाइए

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पुस्तकें 12

चित्र शायरी 2

 

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI