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अहसन मारहरवी

1876 - 1940 | अलीगढ़, भारत

प्रमुखतम उत्तर- क्लासिक शायरों में शामिल

प्रमुखतम उत्तर- क्लासिक शायरों में शामिल

अहसन मारहरवी

ग़ज़ल 20

शेर 23

मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है

ये ज़िंदगी की है सूरत तो ज़िंदगी क्या है

तमाम उम्र इसी रंज में तमाम हुई

कभी ये तुम ने पूछा तिरी ख़ुशी क्या है

किसी माशूक़ का आशिक़ से ख़फ़ा हो जाना

रूह का जिस्म से गोया है जुदा हो जाना

साक़ी वाइज़ में ज़िद है बादा-कश चक्कर में है

तौबा लब पर और लब डूबा हुआ साग़र में है

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हमारा इंतिख़ाब अच्छा नहीं दिल तो फिर तू ही

ख़याल-ए-यार से बेहतर कोई मेहमान पैदा कर

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पुस्तकें 28

ऑडियो 6

ऐ दिल न सुन अफ़्साना किसी शोख़ हसीं का

चाहिए इश्क़ में इस तरह फ़ना हो जाना

जब तक अपने दिल में उन का ग़म रहा

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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