Ahsan Yusuf Zai's Photo'

अहसन यूसुफ़ ज़ई

दौलताबाद, भारत

अहसन यूसुफ़ ज़ई

ग़ज़ल 9

शेर 7

बरसात थम चुकी है मगर हर शजर के पास

इतना तो है कि आप का दामन भिगो सके

नींद को लोग मौत कहते हैं

ख़्वाब का नाम ज़िंदगी भी है

काग़ज़ की नाव हूँ जिसे तिनका डुबो सके

यूँ भी नहीं कि आप से ये भी हो सके

हमारी साँसें मिली हैं गिन के

जाने कितने बजे हैं दिन के

लुटेरों के लिए सोती हैं आँखें

मगर हम अपने अंदर जागते हैं

पुस्तकें 1

Tah-e-Dariya

 

1980