संपूर्ण
परिचय
ग़ज़ल136
नज़्म7
शेर139
हास्य शायरी11
ई-पुस्तक79
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चित्र शायरी 15
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वीडियो9
क़ितआ37
रुबाई53
क़िस्सा8
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मुखम्मस1
अकबर इलाहाबादी
ग़ज़ल 136
नज़्म 7
अशआर 139
हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
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इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद
अक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता
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दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ
बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ
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हम क्या कहें अहबाब क्या कार-ए-नुमायाँ कर गए
बी-ए हुए नौकर हुए पेंशन मिली फिर मर गए
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हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना
हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना
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हास्य शायरी 11
क़ितआ 37
रुबाई 53
क़िस्सा 8
पुस्तकें 79
चित्र शायरी 15
हर एक से सुना नया फ़साना हम ने देखा दुनिया में एक ज़माना हम ने अव्वल ये था कि वाक़फ़ियत पे था नाज़ आख़िर ये खुला कि कुछ न जाना हम ने
वीडियो 9
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