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आलम ख़ुर्शीद

1959 | पटना, भारत

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायर।

महत्वपूर्ण उत्तर-आधुनिक शायर।

आलम ख़ुर्शीद

ग़ज़ल 48

अशआर 25

इश्क़ में तहज़ीब के हैं और ही कुछ फ़लसफ़े

तुझ से हो कर हम ख़फ़ा ख़ुद से ख़फ़ा रहने लगे

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रात गए अक्सर दिल के वीरानों में

इक साए का आना जाना होता है

बहुत सुकून से रहते थे हम अँधेरे में

फ़साद पैदा हुआ रौशनी के आने से

मैं ने बचपन में अधूरा ख़्वाब देखा था कोई

आज तक मसरूफ़ हूँ उस ख़्वाब की तकमील में

हाथ पकड़ ले अब भी तेरा हो सकता हूँ मैं

भीड़ बहुत है इस मेले में खो सकता हूँ मैं

पुस्तकें 9

 

वीडियो 4

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
याद करते हो मुझे सूरज निकल जाने के बा'द

आलम ख़ुर्शीद

हमेशा दिल में रहता है कभी गोया नहीं जाता

आलम ख़ुर्शीद

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI