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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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अनवर जलालपुरी

1947 - 2018 | जलालपुर, भारत

शायर और मुशायरों के संचालक, ‘गीता’ और ‘गीतांजलि’ का उर्दू में पद्यात्मक अनुवाद भी किया

शायर और मुशायरों के संचालक, ‘गीता’ और ‘गीतांजलि’ का उर्दू में पद्यात्मक अनुवाद भी किया

अनवर जलालपुरी

ग़ज़ल 5

 

अशआर 9

कोई पूछेगा जिस दिन वाक़ई ये ज़िंदगी क्या है

ज़मीं से एक मुट्ठी ख़ाक ले कर हम उड़ा देंगे

मेरा हर शेर हक़ीक़त की है ज़िंदा तस्वीर

अपने अशआर में क़िस्सा नहीं लिख्खा मैं ने

सभी के अपने मसाइल सभी की अपनी अना

पुकारूँ किस को जो दे साथ उम्र भर मेरा

मुसलसल धूप में चलना चराग़ों की तरह जलना

ये हंगामे तो मुझ को वक़्त से पहले थका देंगे

अब नाम नहीं काम का क़ाएल है ज़माना

अब नाम किसी शख़्स का रावन मिलेगा

पुस्तकें 9

 

वीडियो 30

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ऑडियो 4

क़याम-गाह न कोई न कोई घर मेरा

ज़ुल्फ़ को अब्र का टुकड़ा नहीं लिख्खा मैं ने

पराया कौन है और कौन अपना सब भुला देंगे

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