Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

अतुल अजनबी

ग़ज़ल 11

अशआर 7

पत्तों को छोड़ देता है अक्सर ख़िज़ाँ के वक़्त

ख़ुद-ग़र्ज़ी ही कुछ ऐसी यहाँ हर शजर में है

  • शेयर कीजिए

पत्तों को छोड़ देता है अक्सर ख़िज़ाँ के वक़्त

ख़ुद-ग़र्ज़ी ही कुछ ऐसी यहाँ हर शजर में है

  • शेयर कीजिए

अजब ख़ुलूस अजब सादगी से करता है

दरख़्त नेकी बड़ी ख़ामुशी से करता है

  • शेयर कीजिए

अजब ख़ुलूस अजब सादगी से करता है

दरख़्त नेकी बड़ी ख़ामुशी से करता है

  • शेयर कीजिए

जब ग़ज़ल 'मीर' की पढ़ता है पड़ोसी मेरा

इक नमी सी मिरी दीवार में जाती है

पुस्तकें 1

 

चित्र शायरी 1

 

"ग्वालियर" के और शायर

Recitation

बोलिए