अतुल अजनबी
ग़ज़ल 11
अशआर 7
जब ग़ज़ल 'मीर' की पढ़ता है पड़ोसी मेरा
इक नमी सी मिरी दीवार में आ जाती है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere