Basir Sultan Kazmi's Photo'

बासिर सुल्तान काज़मी

1953 | मांचसटर, इंग्लैंड

आधुनिक शायर व नासिर काज़मी के पुत्र

आधुनिक शायर व नासिर काज़मी के पुत्र

बासिर सुल्तान काज़मी

ग़ज़ल 46

नज़्म 9

शेर 14

गिला भी तुझ से बहुत है मगर मोहब्बत भी

वो बात अपनी जगह है ये बात अपनी जगह

कैसे याद रही तुझ को

मेरी इक छोटी सी भूल

जब भी मिले हम उन से उन्हों ने यही कहा

बस आज आने वाले थे हम आप की तरफ़

दिल लगा लेते हैं अहल-ए-दिल वतन कोई भी हो

फूल को खिलने से मतलब है चमन कोई भी हो

'बासिर' तुम्हें यहाँ का अभी तजरबा नहीं

बीमार हो? पड़े रहो, मर भी गए तो क्या

पुस्तकें 12

चित्र शायरी 2

 

वीडियो 4

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

बासिर सुल्तान काज़मी

कर लिया दिन में काम आठ से पाँच

बासिर सुल्तान काज़मी

बादल है और फूल खिले हैं सभी तरफ़

बासिर सुल्तान काज़मी

संबंधित शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI