Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Bekhud Mohani's Photo'

बेख़ुद मोहानी

1883 - 1940 | लखनऊ, भारत

लोकप्रिय शायर, लेखक और टीकाकार. ग़ालिब के कलाम की व्याख्या के लिए मशहूर. ‘गंजीना-ए-तहक़ीक़’ नामक शायरी पर आलोचनात्मक लेखों का संग्रह प प्रकाशित हुआ

लोकप्रिय शायर, लेखक और टीकाकार. ग़ालिब के कलाम की व्याख्या के लिए मशहूर. ‘गंजीना-ए-तहक़ीक़’ नामक शायरी पर आलोचनात्मक लेखों का संग्रह प प्रकाशित हुआ

बेख़ुद मोहानी

ग़ज़ल 45

अशआर 7

उमीद का ये रंग है हुजूम-रंज-ओ-यास में

कि जिस तरह कोई हसीं हो मातमी लिबास में

  • शेयर कीजिए

उमीद का ये रंग है हुजूम-रंज-ओ-यास में

कि जिस तरह कोई हसीं हो मातमी लिबास में

  • शेयर कीजिए

लज़्ज़त कभी थी अब तो मुसीबत सी हो गई

मुझ को गुनाह करने की आदत सी हो गई

  • शेयर कीजिए

लज़्ज़त कभी थी अब तो मुसीबत सी हो गई

मुझ को गुनाह करने की आदत सी हो गई

  • शेयर कीजिए

क्यूँ उलझते हो हर इक बात पे 'बेख़ुद' उन से

तुम भी नादान बने जाते हो नादान के साथ

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 8

 

"लखनऊ" के और शायर

Recitation

बोलिए