Bekhud Mohani's Photo'

बेख़ुद मोहानी

1883 - 1940 | लखनऊ, भारत

लोकप्रिय शायर, लेखक और टीकाकार. ग़ालिब के कलाम की व्याख्या के लिए मशहूर. ‘गंजीना-ए-तहक़ीक़’ नामक शायरी पर आलोचनात्मक लेखों का संग्रह प प्रकाशित हुआ

लोकप्रिय शायर, लेखक और टीकाकार. ग़ालिब के कलाम की व्याख्या के लिए मशहूर. ‘गंजीना-ए-तहक़ीक़’ नामक शायरी पर आलोचनात्मक लेखों का संग्रह प प्रकाशित हुआ

बेख़ुद मोहानी

ग़ज़ल 26

शेर 7

उमीद का ये रंग है हुजूम-रंज-ओ-यास में

कि जिस तरह कोई हसीं हो मातमी लिबास में

  • शेयर कीजिए

लज़्ज़त कभी थी अब तो मुसीबत सी हो गई

मुझ को गुनाह करने की आदत सी हो गई

  • शेयर कीजिए

क्यूँ उलझते हो हर इक बात पे 'बेख़ुद' उन से

तुम भी नादान बने जाते हो नादान के साथ

  • शेयर कीजिए

उस के हाथों मिला चैन मुझी को दम भर

मुझ से ले कर दिल-ए-बेताब करोगे क्या तुम

  • शेयर कीजिए

नशेमन फूँकने वाले हमारी ज़िंदगी ये है

कभी रोए कभी सज्दे किए ख़ाक-ए-नशेमन पर

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 7

 

"लखनऊ" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI