Bilal Ahmad's Photo'

बिलाल अहमद

1979

बिलाल अहमद

ग़ज़ल 6

शेर 9

अजीब क़ैद थी जिस में बहुत ख़ुशी थी मुझे

अब अश्क थमते नहीं हैं ये क्या रिहा हुआ मैं

हमारी ख़ाक तबर्रुक समझ के ले जाओ

हमारी जान मोहब्बत की लौ में जलती थी

सुना है मैं ने अज़िय्यत मज़ा भी देती है

सुना है दिल की ख़लिश में सकूँ भी होता है

एक हालत थी मिरी और एक हालत दिल की थी

मेरी हालत तो वही है दिल की वो हालत गई

एक काँटे की खटक से दिल मिरा आबाद था

वो गया तो दिल से मेरे दर्द की राहत गई