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दाग़ देहलवी

1831 - 1905 | दिल्ली, भारत

उर्दू के सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल। शायरी में चुस्ती , शोख़ी और मुहावरों के इस्तेमाल के लिए प्रसिद्ध

उर्दू के सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल। शायरी में चुस्ती , शोख़ी और मुहावरों के इस्तेमाल के लिए प्रसिद्ध

दाग़ देहलवी

ग़ज़ल 179

अशआर 195

तुम्हारा दिल मिरे दिल के बराबर हो नहीं सकता

वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता

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हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'

जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं

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मिलाते हो उसी को ख़ाक में जो दिल से मिलता है

मिरी जाँ चाहने वाला बड़ी मुश्किल से मिलता है

वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे

तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था

सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं

हम देखने वालों की नज़र देख रहे हैं

क़ितआ 2

 

क़िस्सा 5

 

नअत 1

 

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चित्र शायरी 36

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अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

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अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

अज्ञात

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

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उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं

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ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

अज्ञात

ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

शुमोना राय बिस्वास

ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया

दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया

मोहम्मद रफ़ी

ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया

दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया

मेहदी हसन

ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया

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मेहरान अमरोही

सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं

मेहरान अमरोही

सबक़ ऐसा पढ़ा दिया तू ने

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ख़ातिर से या लिहाज़ से मैं मान तो गया

दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया

ताहिरा सैयद

ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया

दाग़ देहलवी

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ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा

दाग़ देहलवी

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