Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Govind Gulshan's Photo'

गोविन्द गुलशन

1957 - 2026 | ग़ाज़ियाबाद, भारत

गोविन्द गुलशन

ग़ज़ल 10

अशआर 6

ज़िद पर अड़े हुए हैं ये दिल भी दिमाग़ भी

अब देखना है इन में असर-दार कौन है

पहले तलाश कीजिए मंज़िल की रहगुज़र

फिर सोचिए कि राह में दीवार कौन है

रहगुज़र है उदास मेरी तरह

जाने कब वो यहाँ से गुज़रेगा

ज़ेहन और दिल में जो अन-बन है वो अन-बन रहे

इस लिए दरमियाँ दीवार बना रक्खी है

फिर मुझे याद आएगा बचपन

इक ज़माना गुमाँ से गुज़रेगा

वीडियो 19

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

गोविन्द गुलशन

मुंतज़िर आँखें हैं मेरी शाम से

गोविन्द गुलशन

मुंतज़िर आँखें हैं मेरी शाम से

गोविन्द गुलशन

मुंतज़िर आँखें हैं मेरी शाम से

गोविन्द गुलशन

संबंधित शायर

"ग़ाज़ियाबाद" के और शायर

Recitation

बोलिए