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हबीब जालिब

1928 - 1993 | लाहौर, पाकिस्तान

लोकप्रिय और क्रांतिकारी पाकिस्तानी शायर , राजनैतिक दमन के विरोध के लिए प्रसिद्ध

लोकप्रिय और क्रांतिकारी पाकिस्तानी शायर , राजनैतिक दमन के विरोध के लिए प्रसिद्ध

हबीब जालिब

ग़ज़ल 72

नज़्म 42

अशआर 25

दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है

दोस्तों ने भी क्या कमी की है

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था

उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था

एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं

दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं

दुनिया तो चाहती है यूँही फ़ासले रहें

दुनिया के मश्वरों पे जा उस गली में चल

लोग डरते हैं दुश्मनी से तिरी

हम तिरी दोस्ती से डरते हैं

क़ितआ 17

पुस्तकें 12

चित्र शायरी 10

 

वीडियो 41

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

हबीब जालिब

हबीब जालिब

हबीब जालिब

हबीब जालिब

हबीब जालिब

हबीब जालिब

हबीब जालिब

हबीब जालिब

हबीब जालिब

हबीब जालिब

हबीब जालिब

14-अगस्त

कहाँ टूटी हैं ज़ंजीरें हमारी हबीब जालिब

Sar-e-Mimber Wo Khwabon Ke Mehal Tameer Karte Hein

हबीब जालिब

उट्ठो मरने का हक़ इस्तिमाल करो

जीने का हक़ सामराज ने छीन लिया हबीब जालिब

मौलाना

बहुत मैं ने सुनी है आप की तक़रीर मौलाना हबीब जालिब

अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं

हबीब जालिब

ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना

ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना हबीब जालिब

ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना

ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना हबीब जालिब

दस्तूर

दीप जिस का महल्लात ही में जले हबीब जालिब

बगिया लहूलुहान

हरियाली को आँखें तरसें बगिया लहूलुहान हबीब जालिब

भुला भी दे उसे जो बात हो गई प्यारे

हबीब जालिब

मुलाक़ात

जो हो न सकी बात वो चेहरों से अयाँ थी हबीब जालिब

मुलाक़ात

जो हो न सकी बात वो चेहरों से अयाँ थी हबीब जालिब

मुशीर

मैं ने उस से ये कहा हबीब जालिब

'मीर'-ओ-'ग़ालिब' बने 'यगाना' बने

हबीब जालिब

रेफ़्रेनडम

शहर में हू का आलम था हबीब जालिब

वही हालात हैं फ़क़ीरों के

हबीब जालिब

शेर से शाइरी से डरते हैं

हबीब जालिब

सहाफ़ी से

क़ौम की बेहतरी का छोड़ ख़याल हबीब जालिब

हम ने सुना था सहन-ए-चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं

हबीब जालिब

ऑडियो 16

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था

बड़े बने थे 'जालिब' साहब पिटे सड़क के बीच

शेर से शाइरी से डरते हैं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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