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इरफ़ान सत्तार

1968 | कनाडा

इरफ़ान सत्तार

ग़ज़ल 59

अशआर 36

इक चुभन है कि जो बेचैन किए रहती है

ऐसा लगता है कि कुछ टूट गया है मुझ में

आबाद मुझ में तेरे सिवा और कौन है?

तुझ से बिछड़ रहा हूँ तुझे खो नहीं रहा

मैं तुझ से साथ भी तो उम्र भर का चाहता था

सो अब तुझ से गिला भी उम्र भर का हो गया है

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तुम गए हो तो अब आईना भी देखेंगे

अभी अभी तो निगाहों में रौशनी हुई है

ऐसी दुनिया में कब तक गुज़ारा करें तुम ही कह दो कि कैसे गवारा करें

रात मुझ से मिरी बेबसी ने कहा बेबसी के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल

पुस्तकें 2

 

चित्र शायरी 5

 

वीडियो 18

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हास्य वीडियो
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इरफ़ान सत्तार

ऑडियो 7

क्या बताऊँ कि जो हंगामा बपा है मुझ में

कोई मिला तो किसी और की कमी हुई है

ब-ज़ोम-ए-अक़्ल ये कैसा गुनाह मैं ने किया

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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