जिगर मुरादाबादी और रियाज़ ख़ैराबादी : उर्दू शायरी में ख़मरियात के दो अलग रंग
रियाज़ ख़ैराबादी ने बिना पिए जवानी और इश्क़ की मस्ती को शराब के परदे में पेश किया, जबकि जिगर मुरादाबादी की ख़मरियात (शराब की शायरी) उनकी अपनी रिंदाना ज़िंदगी की सच्ची झलक हैं।