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जोश लखनवी

1827/1828 - 1885/1886

जोश लखनवी

अशआर 2

अब्र में चाँद गर देखा हो

रुख़ पे ज़ुल्फ़ों को डाल कर देखो

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सच कहते हैं कि नाम मोहब्बत का है बड़ा

उल्फ़त जता के दोस्त को दुश्मन बना लिया

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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