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जोशिश अज़ीमाबादी

1737 - 1801

मीर के समकालीन, अज़ीमाबाद स्कूल के प्रतिष्ठित शायर, दिल्ली स्कूल के रंग में शायरी के लिए मशहूर

मीर के समकालीन, अज़ीमाबाद स्कूल के प्रतिष्ठित शायर, दिल्ली स्कूल के रंग में शायरी के लिए मशहूर

जोशिश अज़ीमाबादी

ग़ज़ल 59

अशआर 44

अहवाल देख कर मिरी चश्म-ए-पुर-आब का

दरिया से आज टूट गया दिल हबाब का

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उस के रुख़्सार पर कहाँ है ज़ुल्फ़

शोला-ए-हुस्न का धुआँ है ज़ुल्फ़

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किस तरह तुझ से मुलाक़ात मयस्सर होवे

ये दुआ-गो तिरा ने ज़ोर ज़र रखता है

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ध्यान में उस के फ़ना हो कर कोई मुँह देख ले

दिल वो आईना नहीं जो हर कोई मुँह देख ले

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छुप-छुप के देखते हो बहुत उस को हर कहीं

होगा ग़ज़ब जो पड़ गई उस की नज़र कहीं

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क़ितआ 1

 

पुस्तकें 5

 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI