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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Kaif Ahmed Siddiqui's Photo'

कैफ़ अहमद सिद्दीकी

1943 - 1986 | सीतापुर, भारत

प्रतिष्ठित शायर, बच्चों की नज़्में लिखने के लिए प्रसिद्ध

प्रतिष्ठित शायर, बच्चों की नज़्में लिखने के लिए प्रसिद्ध

कैफ़ अहमद सिद्दीकी

ग़ज़ल 24

नज़्म 20

अशआर 14

महसूस हो रहा है कि मैं ख़ुद सफ़र में हूँ

जिस दिन से रेल पर मैं तुझे छोड़ने गया

इक बरस भी अभी नहीं गुज़रा

कितनी जल्दी बदल गए चेहरे

ख़ुशी की आरज़ू क्या दिल में ठहरे

तिरे ग़म ने बिठा रक्खे हैं पहरे

आज कुछ ऐसे शोले भड़के बारिश के हर क़तरे से

धूप पनाहें माँग रही है भीगे हुए दरख़्तों में

तन्हाइयों को सौंप के तारीकियों का ज़हर

रातों को भाग आए हम अपने मकान से

लोरी 1

 

पुस्तकें 5

 

चित्र शायरी 1

 

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