कमल कटारिया करन
ग़ज़ल 14
अशआर 1
जब भी देखा है फ़क़त दाग़ नज़र आए मुझे
कितनी हसरत थी तिरा चाँद सा चेहरा देखूँ
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere