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काविश कमाल

1945 - 2015 | पश्चिम बंगाल, भारत

पश्चिम बंगाल से संबंध रखने वाले सादे, शालीन और सहल-ए-मुम्तना के शायर

पश्चिम बंगाल से संबंध रखने वाले सादे, शालीन और सहल-ए-मुम्तना के शायर

काविश कमाल

ग़ज़ल 13

अशआर 14

जो मुसाफ़िर है उसे क्या धूप की शिद्दत का ग़म

सर पे साए के लिए माँ की दु'आ ले जाएगा

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नाम उन के चमकते हैं तारीख़ के सफ़्हों पर

जो लोग ज़माने की तक़दीर बदलते हैं

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साक़ी तिरी महफ़िल का ये दस्तूर भी देखा

छलकाए कोई जाम कोई बूँद को तरसे

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जुर्म किस का है कौन मुजरिम है

और होता है सर क़लम किस का

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बे-हुनर लोग हैं मंज़र-ए-'आम पर

और गोशा-नशीं बा-हुनर आदमी

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