Khaleel Tanveer's Photo'

खलील तनवीर

1944

खलील तनवीर

ग़ज़ल 14

शेर 31

औरों की बुराई को देखूँ वो नज़र दे

हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे

रुस्वा हुए ज़लील हुए दर-ब-दर हुए

हक़ बात लब पे आई तो हम बे-हुनर हुए

इस भरे शहर में दिन रात ठहरते ही नहीं

कौन यादों के सफ़र-नामे को तहरीर करे

  • शेयर कीजिए

परिंद शाख़ पे तन्हा उदास बैठा है

उड़ान भूल गया मुद्दतों की बंदिश में

  • शेयर कीजिए

वो लोग अपने आप में कितने अज़ीम थे

जो अपने दुश्मनों से भी नफ़रत कर सके

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 2

Gil-e-Lajvard

 

2005

Shumara Number-001

2010