Khalid Sharif's Photo'

ख़ालिद शरीफ़

1947 | पाकिस्तान

ख़ालिद शरीफ़

ग़ज़ल 9

नज़्म 1

 

अशआर 9

बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई

इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया

'ख़ालिद' मैं बात बात पे कहता था जिस को जान

वो शख़्स आख़िरश मुझे बे-जान कर गया

आसमाँ झाँक रहा है 'ख़ालिद'

चाँद कमरे में मिरे उतरा है

आज कुछ रंग दिगर है मिरे घर का 'ख़ालिद'

सोचता हूँ ये तिरी याद है या ख़ुद तू है

नाकाम हसरतों के सिवा कुछ नहीं रहा

दुनिया में अब दुखों के सिवा कुछ नहीं रहा

क़ितआ 1

 

पुस्तकें 14

Recitation

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