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ख़ुर्शीद रिज़वी

1942 | पाकिस्तान

ख़ुर्शीद रिज़वी

ग़ज़ल 52

शेर 26

बस दरीचे से लगे बैठे रहे अहल-ए-सफ़र

सब्ज़ा जलता रहा और याद-ए-वतन आती रही

तमाम उम्र अकेले में तुझ से बातें कीं

तमाम उम्र तिरे रू-ब-रू ख़मोश रहे

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तू मुझे बनते बिगड़ते हुए अब ग़ौर से देख

वक़्त कल चाक पे रहने दे रहने दे मुझे

ये दौर वो है कि बैठे रहो चराग़-तले

सभी को बज़्म में देखो मगर दिखाई दो

आख़िर को हँस पड़ेंगे किसी एक बात पर

रोना तमाम उम्र का बे-कार जाएगा

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पुस्तकें 5

अरबी अदब क़ब्ल अज़ इस्लाम

खण्ड-001

2010

Shaakh-e-Tanha

 

1987

Taaleef

 

1995

Tareekh-e-Uoom Mein Tahzeeb-e-Islami Ka Muqam

 

2005

यकजा

कुल्लियात

2012

 

चित्र शायरी 2

आख़िर को हँस पड़ेंगे किसी एक बात पर रोना तमाम उम्र का बे-कार जाएगा

आख़िर को हँस पड़ेंगे किसी एक बात पर रोना तमाम उम्र का बे-कार जाएगा

 

वीडियो 17

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

ख़ुर्शीद रिज़वी

ख़ुर्शीद रिज़वी

ख़ुर्शीद रिज़वी

ख़ुर्शीद रिज़वी

ख़ुर्शीद रिज़वी

ख़ुर्शीद रिज़वी

ख़ुर्शीद रिज़वी

ख़ुर्शीद रिज़वी

ख़ुर्शीद रिज़वी

ख़ुर्शीद रिज़वी

Dr. Khurshid Rizvi at a mushaira

ख़ुर्शीद रिज़वी

Khurshid Rizvi at a mushaira in Pakistan in 2011

ख़ुर्शीद रिज़वी

phir naya saal naya maah-emoharram aya

ख़ुर्शीद रिज़वी

sab kahe deti hai ashkon ki ravani afsos

ख़ुर्शीद रिज़वी

गो नज़र अक्सर वो हुस्न-ए-ला-ज़वाल आ जाएगा

ख़ुर्शीद रिज़वी

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए

ख़ुर्शीद रिज़वी

ये जो नंग थे ये जो नाम थे मुझे खा गए

ख़ुर्शीद रिज़वी