ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मज्ज़ूब
ग़ज़ल 10
अशआर 2
हर तमन्ना दिल से रुख़्सत हो गई
अब तो आ जा अब तो ख़ल्वत हो गई
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हर तमन्ना दिल से रुख़्सत हो गई
अब तो आ जा अब तो ख़ल्वत हो गई
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जिस्म बे-हिस बे-शिकन बिस्तर रहा
मैं नए अंदाज़ से मुज़्तर रहा
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जिस्म बे-हिस बे-शिकन बिस्तर रहा
मैं नए अंदाज़ से मुज़्तर रहा
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