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मजीद अमजद

1914 - 1974 | पंजाब, पाकिस्तान

आधुनिक उर्दू शायरी के संस्थापकों में विख्यात।

आधुनिक उर्दू शायरी के संस्थापकों में विख्यात।

मजीद अमजद

ग़ज़ल 36

नज़्म 49

अशआर 20

मैं रोज़ इधर से गुज़रता हूँ कौन देखता है

मैं जब इधर से गुज़रूँगा कौन देखेगा

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हाए वो ज़िंदगी-फ़रेब आँखें

तू ने क्या सोचा मैं ने क्या समझा

मैं एक पल के रंज-ए-फ़रावाँ में खो गया

मुरझा गए ज़माने मिरे इंतिज़ार में

मसीह-ओ-ख़िज़्र की उम्रें निसार हों उस पर

वो एक लम्हा जो यारों के दरमियाँ गुज़रे

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क्या रूप दोस्ती का क्या रंग दुश्मनी का

कोई नहीं जहाँ में कोई नहीं किसी का

पुस्तकें 4

 

चित्र शायरी 2

 

ऑडियो 16

इक उम्र दिल की घात से तुझ पर निगाह की

और अब ये कहता हूँ ये जुर्म तो रवा रखता

कभी तो सोच तिरे सामने नहीं गुज़रे

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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