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मज़हर इमाम

1928 - 2012 | दिल्ली, भारत

प्रमुखतम आधुकि शायरों में विख्यात/दूर दर्शन से संबंध

प्रमुखतम आधुकि शायरों में विख्यात/दूर दर्शन से संबंध

मज़हर इमाम

ग़ज़ल 60

नज़्म 5

 

शेर 26

दोस्तों से मुलाक़ात की शाम है

ये सज़ा काट कर अपने घर जाऊँगा

आप को मेरे तआरुफ़ की ज़रूरत क्या है

मैं वही हूँ कि जिसे आप ने चाहा था कभी

एक मैं ने ही उगाए नहीं ख़्वाबों के गुलाब

तू भी इस जुर्म में शामिल है मिरा साथ छोड़

अब तो कुछ भी याद नहीं है

हम ने तुम को चाहा होगा

उस घर की बदौलत मिरे शेरों को है शोहरत

वो घर कि जो इस शहर में बदनाम बहुत है

रेखाचित्र 2

 

पुस्तकें 921

चित्र शायरी 4

 

ऑडियो 8

ज़लज़ले सब दिल के अंदर हो गए

ज़िंदगी काविश-ए-बातिल है मिरा साथ न छोड़

टूटी हुई दीवार का साया तो नहीं हूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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