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मोहम्मद अहमद रम्ज़

1932 - 2010 | कानपुर, भारत

नई ग़ज़ल के प्रतिष्ठित शायर

नई ग़ज़ल के प्रतिष्ठित शायर

मोहम्मद अहमद रम्ज़

ग़ज़ल 37

अशआर 11

तुम गए हो तुम मुझ को ज़रा सँभलने दो

अभी तो नश्शा सा आँखों में इंतिज़ार का है

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हर्फ़ को लफ़्ज़ कर लफ़्ज़ को इज़हार दे

कोई तस्वीर मुकम्मल बना उस के लिए

अब के वस्ल का मौसम यूँही बेचैनी में बीत गया

उस के होंटों पर चाहत का फूल खिला भी कितनी देर

अल्फ़ाज़ की गिरफ़्त से है मावरा हनूज़

इक बात कह गया वो मगर कितने काम की

जैसे ख़ला के पस-मंज़र में रंग रंग के नक़्श-ओ-निगार

बातें उस की वज़्न से ख़ाली लहजा भारी-भरकम है

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पुस्तकें 1

 

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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