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मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

1936 - 2020 | दिल्ली, भारत

प्रमुख आधुनिक शायरों में विख्यात

प्रमुख आधुनिक शायरों में विख्यात

मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

ग़ज़ल 41

नज़्म 37

शेर 14

रोती हुई एक भीड़ मिरे गिर्द खड़ी थी

शायद ये तमाशा मिरे हँसने के लिए था

मुझ से मत बोलो मैं आज भरा बैठा हूँ

सिगरेट के दोनों पैकेट बिल्कुल ख़ाली हैं

शुक्रिया रेशमी दिलासे का

तीर तो आप ने भी मारा था

सुनाइए वो लतीफ़ा हर एक जाम के साथ

कि एक बूँद से ईमान टूट जाता है

सुनता हूँ कि तुझ को भी ज़माने से गिला है

मुझ को भी ये दुनिया नहीं रास आई इधर

बच्चों की कहानी 2

 

पुस्तकें 81

चित्र शायरी 1

 

ऑडियो 6

क्या वस्ल की साअत को तरसने के लिए था

कहाँ तो पा-ए-सफ़र को राह-ए-हयात कम थी

ख़ुश्क आँखों से निकल कर आसमाँ पर फैल जा

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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