प्रबुद्ध सौरभ
ग़ज़ल 14
अशआर 2
मंगल को बजरंग-बली से तेरा शुक्र मनाऊँ
और शुक्र को तू अल्लाह से मेरा मंगल माँगे
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बताऊँ किस हवाले से उन्हें बैराग का मतलब
जो तारे पूछते हैं रात को घर क्यूँ नहीं जाता
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