रेशमा नाहीद रेशम
ग़ज़ल 5
अशआर 2
मंज़िल पे पहुँच सकते नहीं ऐसे मुसाफ़िर
हर गाम पे हो ख़ौफ़ जिन्हें आबला-पा का
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मैं ज़ीस्त के सफ़र में अकेली जो चल पड़ी
अज़्म-ओ-जुनूँ-ओ-शौक़ मिरे कारवाँ हुए
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