साबिर शाह साबिर
ग़ज़ल 14
अशआर 1
अम्न का क़त्ल हो गया जब से
शहर अब बद-हवास रहता है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere