सईद रहमानी के शेर
रेल-गाड़ी के सफ़र में ये हुआ है अक्सर
लोग बैठे हुए सामान बदल देते हैं
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere