सौरभ शेखर
ग़ज़ल 20
अशआर 1
चलाऊँगा तेशा में अब आजिज़ी का
अना उस की मिस्मार हो कर रहेगी
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere