साईल इमरान
ग़ज़ल 2
अशआर 1
यादों के शबिस्तान में बैठा हुआ साइल
तन्हा जो नज़र आता है तन्हा नहीं होता
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere