संपूर्ण
परिचय
ग़ज़ल61
शेर74
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ब्लॉग1
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
ग़ज़ल 61
अशआर 74
अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे
मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे
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अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे
मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे
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मरज़-ए-इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे
न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे
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क़ितआ 4
पुस्तकें 70
चित्र शायरी 16
तू भला है तो बुरा हो नहीं सकता ऐ 'ज़ौक़' है बुरा वो ही कि जो तुझ को बुरा जानता है और अगर तू ही बुरा है तो वो सच कहता है क्यूँ बुरा कहने से तू उस के बुरा मानता है
वीडियो 16
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