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सय्यद ग़ुलाम मोहम्मद मस्त कलकत्तवी

1896 - 1941 | कोलकाता, भारत

सय्यद ग़ुलाम मोहम्मद मस्त कलकत्तवी

ग़ज़ल 1

 

अशआर 2

सुर्ख़-रू होता है इंसाँ ठोकरें खाने के बा'द

रंग लाती है हिना पत्थर पे पिस जाने के बा'द

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कुछ दोस्त से उम्मीद अंदेशा-ए-दुश्मन

होगा वही जो कुछ मिरी क़िस्मत में लिखा है

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चित्र शायरी 1

 

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