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तसनीम अंसारी

1958

तसनीम अंसारी

ग़ज़ल 2

 

अशआर 4

'अजीब शख़्स था अपना पता बताया नहीं

दिया जलाया मगर रौशनी में आया नहीं

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आज तक एक भी गर्दन नहीं मारी तू ने

ये क़बीला तुझे सरदार बनाने से रहा

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ये 'इनायत ये शरफ़ बात ज़रा सी तो नहीं

ये करम आप का सरकार सियासी तो नहीं

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हमारे गाँव तुम्हारी शिकार-गाह नहीं

धुएँ के अब्र से पानी पे वार मत करना

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