महक पहचानती है ख़ून-ए-दिल की
ज़मीन-ए-कूचा-ए-दिलदार ठहरी
ता कि अंगूर हरे हों मिरे ज़ख़्म-ए-दिल के
धानी अंगिया मिरे दिलदार ने रंगवाई है
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
महक पहचानती है ख़ून-ए-दिल की
ज़मीन-ए-कूचा-ए-दिलदार ठहरी
ता कि अंगूर हरे हों मिरे ज़ख़्म-ए-दिल के
धानी अंगिया मिरे दिलदार ने रंगवाई है