aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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ग़ैर-मुरद्दफ़ ग़ज़लें पर ग़ज़लें

क़ाफ़िया रदीफ़ ग़ज़ल के बुनियादी

रुक्न हैं। लेकिन ग़ज़ल रदीफ़ के बग़ैर भी कही जाती है। ऐसी ग़ज़लों को ग़ैर-मुरद्दफ़ ग़ज़ल कहा जाता है। यहाँ आप ऐसी ही चुनिंदा ग़ज़लें जमा की गई हैं। पढ़िए और लुत्फ़-अन्दोज़ होइए।

तुझे पुकारा है बे-इरादा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Jashn-e-Rekhta | 8-9-10 December 2023 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate - New Delhi

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